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Tuesday, 29 March 2016

How to get success Story in Hindi


एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का
था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था।
एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा --
"राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी कोई इछा हॆ?"
प्रजा को चाहने वाला राजा बोला --
"भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ हैं ।आपकी कृपा से राज्य मे सब प्रकार
सुख-शान्ति है । फिर भी मेरी एक ही ईच्छा हैं कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर
धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी कृपा कर दर्शन दीजिये।"
"यह तो सम्भव नहीं है" -- ऐसा कहते हुए भगवान ने राजा को समझाया ।
परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से जिद्द् करने लगा ।
आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पडा ओर वे बोले --
"ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास ले आना और
मैं पहाडी के ऊपर से सभी को दर्शन दूँगा ।"
ये सुन कर राजा अत्यन्त प्रसन्न हुअा और भगवान को धन्यवाद दिया ।
अगले दिन सारे नगर मे ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे
साथ पहुँचे, वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देगें।
दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर पहाडी की
ओर चलने लगा।
चलते-चलते रास्ते मे एक स्थान पर तांबे कि सिक्कों का पहाड देखा। प्रजा में
से कुछ एक लोग उस ओर भागने लगे । तभी ज्ञानी राजा ने सबको सर्तक
किया कि कोई उस ओर ध्यान न दे,क्योकि तुम सब भगवान से मिलने जा रहे हो,
इन तांबे के सिक्कों के पीछे अपने भाग्य को लात मत मारो ।
परन्तु लोभ-लालच मे वशीभूत प्रजा के कुछ एक लोग तो तांबे की सिक्कों वाली
पहाड़ी की ओर भाग ही गयी और सिक्कों कि गठरी बनाकर अपने घर कि ओर
चलने लगे। वे मन ही मन सोच रहे थे, पहले ये सिक्कों को समेट ले, भगवान से
तो फिर कभी मिल ही लेगे ।
राजा खिन्न मन से आगे बढे । कुछ दूर चलने पर चांदी कि सिक्कों का चमचमाता
पहाड़ दिखाई दिया । इस वार भी बचे हुये प्रजा में से कुछ लोग, उस ओर भागने
लगे ओर चांदी के सिक्कों को गठरी बनाकर अपनी घर की ओर चलने लगे।
उनके मन मे विचार चल रहा था कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है । चांदी
के इतने सारे सिक्के फिर मिले न मिले, भगवान तो फिर कभी मिल ही जायेगें ।
इसी प्रकार कुछ दूर और चलने पर सोने के सिक्कों का पहाड़ नजर आया।अब
तो प्रजा जनो में बचे हुये सारे लोग तथा राजा के स्वजन भी उस ओर भागने लगे।
वे भी दूसरों की तरह सिक्कों कि गठरीयां लाद-लाद कर अपने-अपने घरों की
ओर चल दिये ।
अब केवल राजा ओर रानी ही शेष रह गये थे । राजा रानी से कहने लगे --
"देखो कितने लोभी ये लोग । भगवान से मिलने का महत्व ही नहीं जानते हैं।
भगवान के सामने सारी दुनियां की दौलत क्या चीज हैं..?"
सही बात है -- रानी ने राजा कि बात का समर्थन किया और वह आगे बढने लगे।
कुछ दुर चलने पर राजा ओर रानी ने देखा कि सप्तरंगि आभा बिखरता हीरों का
पहाड़ हैं । अब तो रानी से भी रहा नहीं गया, हीरों के आर्कषण से वह भी दौड
पड़ी और हीरों कि गठरी बनाने लगी । फिर भी उसका मन नहीं भरा तो साड़ी के
पल्लू मेँ भी बांधने लगी । वजन के कारण रानी के वस्त्र देह से अलग हो गये,
परंतु हीरों का तृष्णा अभी भी नहीं मिटी। यह देख राजा को अत्यन्त ही ग्लानि
ओर विरक्ति हुई । बड़े दुःखद मन से राजा अकेले ही आगे बढते गये ।
वहाँ सचमुच भगवान खड़े उसका इन्तजार कर रहे थे । राजा को देखते ही
भगवान मुसकुराये ओर पुछा -- "कहाँ है तुम्हारी प्रजा और तुम्हारे प्रियजन ।
मैं तो कब से उनसे मिलने के लिये बेकरारी से उनका इन्तजार कर रहा हूॅ ।"
राजा ने शर्म और आत्म-ग्लानि से अपना सर झुका दिया । तब भगवान ने राजा
को समझाया --
"राजन, जो लोग अपने जीवन में भौतिक सांसारिक प्राप्ति को मुझसे अधिक
मानते हैं, उन्हें कदाचित मेरी प्राप्ति नहीं होती और वह मेरे स्नेह तथा कृपा से
भी वंचित रह जाते हैं..!!"
:
सार..
जो जीव अपनी मन, बुद्धि और आत्मा से भगवान की शरण में जाते हैं, और
सर्व लौकिक सम्बधों को छोडके प्रभु को ही अपना मानते हैं वो ही भगवान के प्रिय बनते हैं..!!

इस स्टोरी को हम अपनी डे to डे लाइफ में भी लगा सकते हैं, हम aim तो बढ़ा बना लेते हैं फॉर example- एक सक्सेसफुल ब्लॉगर बनने का , पर वहां तक पहुंचने से पहले कई जगह हु रुक जाते हैं जैसे आज मन नहीं है , आज बहुत थक गए हैं , आज और बहुत काम हैं और अपन aim तक नहीं पहुंच पाते. अगर हम सच में कुछ भी बढ़ा करना चाहते हैं लाइफ में तो रस्ते में आने वाली सब रुकावट की तरफ से नज़र हटानी पड़ेगी.

Tuesday, 22 March 2016

Samsya ka samadham ( sau unth story in hindi)

🐪🐪  सौ  ऊंट  🐪🐪

किसी  शहर  में, एक आदमी प्राइवेट  कंपनी  में  जॉब  करता था . वो  अपनी  ज़िन्दगी  से  खुश  नहीं  था , हर  समय  वो  किसी  न  किसी  समस्या  से  परेशान  रहता  था .

एक बार  शहर  से  कुछ  दूरी  पर  एक  महात्मा  का  काफिला  रुका . शहर  में  चारों  और  उन्ही की चर्चा  थी.

बहुत  से  लोग  अपनी  समस्याएं  लेकर  उनके  पास  पहुँचने  लगे ,
 उस आदमी  ने  भी  महात्मा  के  दर्शन  करने  का  निश्चय  किया .

छुट्टी के दिन  सुबह -सुबह ही उनके  काफिले  तक  पहुंचा . बहुत इंतज़ार  के  बाद उसका  का  नंबर  आया .

वह  बाबा  से  बोला  ,” बाबा , मैं  अपने  जीवन  से  बहुत  दुखी  हूँ , हर  समय  समस्याएं  मुझे  घेरी  रहती  हैं , कभी ऑफिस  की  टेंशन  रहती  है , तो  कभी  घर  पर  अनबन  हो  जाती  है , और  कभी  अपने  सेहत  को  लेकर  परेशान रहता  हूँ ….

 बाबा  कोई  ऐसा  उपाय  बताइये  कि  मेरे  जीवन  से  सभी  समस्याएं  ख़त्म  हो  जाएं  और  मैं  चैन  से  जी सकूँ ?

बाबा  मुस्कुराये  और  बोले , “ पुत्र  , आज  बहुत देर  हो  गयी  है  मैं  तुम्हारे  प्रश्न  का  उत्तर  कल  सुबह दूंगा … लेकिन क्या  तुम  मेरा  एक  छोटा  सा  काम  करोगे …?”

“हमारे  काफिले  में  सौ ऊंट  🐪 हैं  ,
मैं  चाहता हूँ  कि  आज  रात  तुम  इनका  खयाल  रखो …
जब  सौ  के  सौ  ऊंट 🐪  बैठ  जाएं  तो  तुम   भी  सो  जाना …”,

ऐसा कहते  हुए   महात्मा👳  अपने  तम्बू  में  चले  गए ..

अगली  सुबह  महात्मा उस आदमी  से  मिले  और  पुछा , “ कहो  बेटा , नींद  अच्छी  आई .”

वो  दुखी  होते  हुए  बोला :
 “कहाँ  बाबा , मैं  तो  एक  पल  भी  नहीं  सो  पाया. मैंने  बहुत  कोशिश  की  पर  मैं  सभी  ऊंटों🐪  को  नहीं  बैठा  पाया , कोई  न  कोई  ऊंट 🐪 खड़ा  हो  ही  जाता …!!!

बाबा बोले  , “ बेटा , कल  रात  तुमने  अनुभव  किया कि  चाहे  कितनी  भी  कोशिश  कर  लो  सारे  ऊंट  🐪 एक  साथ  नहीं  बैठ  सकते …

तुम  एक  को  बैठाओगे  तो  कहीं  और  कोई  दूसरा  खड़ा  हो  जाएगा.

इसी  तरह  तुम एक  समस्या  का  समाधान  करोगे  तो  किसी  कारणवश  दूसरी खड़ी हो  जाएगी ..

पुत्र  जब  तक  जीवन  है  ये समस्याएं  तो  बनी  ही  रहती  हैं … कभी  कम  तो  कभी  ज्यादा ….”

“तो  हमें  क्या  करना चाहिए  ?” , आदमी  ने  जिज्ञासावश  पुछा .

“इन  समस्याओं  के  बावजूद  जीवन  का  आनंद  लेना  सीखो …

कल  रात  क्या  हुआ ?
1) कई  ऊंट 🐪  रात होते -होते  खुद ही  बैठ  गए  ,
2) कई  तुमने  अपने  प्रयास  से  बैठा  दिए ,
3) बहुत  से  ऊंट 🐪 तुम्हारे  प्रयास  के  बाद  भी  नहीं बैठे … और बाद  में  तुमने  पाया  कि उनमे से कुछ खुद ही  बैठ  गए ….

कुछ  समझे ….??
समस्याएं  भी  ऐसी  ही  होती  हैं..

1) कुछ  तो  अपने आप ही ख़त्म  हो  जाती  हैं ,
2) कुछ  को  तुम  अपने  प्रयास  से  हल  कर लेते  हो …
3) कुछ  तुम्हारे  बहुत  कोशिश  करने  पर   भी  हल  नहीं  होतीं ,

ऐसी  समस्याओं  को   समय  पर  छोड़  दो … उचित  समय  पर  वे खुद  ही  ख़त्म  हो  जाती  हैं.!!

जीवन  है, तो  कुछ समस्याएं रहेंगी  ही  रहेंगी …. पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  की  तुम  दिन  रात  उन्ही  के  बारे  में  सोचते  रहो …

समस्याओं को  एक  तरफ  रखो
और  जीवन  का  आनंद  लो…

 चैन की नींद सो …

 जब  उनका  समय  आएगा  वो  खुद  ही  हल  हो  जाएँगी"...

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱

बिंदास मुस्कुराओ 😊क्या ग़म हे,..
ज़िन्दगी में टेंशन😁 किसको कम हे..

अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम हे..
जिन्दगी का नाम ही
कभी ख़ुशी कभी ग़म हे..!!

🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿

Thursday, 17 March 2016

Secret of success story in hindi सफलता का रहस्य

सफलता का रहस्य


एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा सफलता का रहस्य क्या है?
सुकरात ने उस लड़के से कहा - तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलना .वो मिले
.  सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुाँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया. लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. किर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही उसने तेज़ी से साँस ली
सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहा थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”
लड़के ने उत्तर ददया,”साँस लेना”
सुकरात ने कहा,” यह सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी बुरी  तरह से चाहोगे जितना की तुम साँस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

दोस्तों हम कहते तो हैं की हमें सफलता चाहिए पर अपने दिल से पूछे की क्या उसके लिए हम उतना effort देते हैं जितना सच में देना चाहिए
अगर उतना effort देंगे तो हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता

Wednesday, 16 March 2016

अपना योगदान Story by Ratan Tata in Hindi



दुनिया के जाने-माने industrialist Ratan Tata ने अपनी एक Tweet के माध्यम से एक बहुत ही inspirational incident share किया था।
पैसा आपका है लेकिन संसाधन समाज के हैं!
जर्मनी एक highly industrialized देश है। ऐसे देश में, बहुत से लोग सोचेंगे कि वहां के लोग बड़ी luxurious लाइफ जीते होंगे।
जब हम हैम्बर्ग पहुंचे, मेरे कलीग्स एक रेस्टोरेंट में घुस गए, हमने देखा कि बहुत से टेबल खाली थे। वहां एक टेबल था जहाँ एक यंग कपल खाना खा रहा था। टेबल पर बस दो dishes और beer की दो bottles थीं। मैं सोच रहा था कि क्या ऐसा सिंपल खाना रोमांटिक हो सकता है, और क्या वो लड़की इस कंजूस लड़के को छोड़ेगी!
एक दूसरी टेबल पर कुछ बूढी औरतें भी थीं। जब कोई डिश सर्व की जाती तो वेटर सभी लोगों की प्लेट में खाना निकाल देता, और वो औरतें प्लेट में मौजूद खाने को पूरी तरह से ख़तम कर देतीं।
चूँकि हम भूखे थे तो हमारे लोकल कलीग ने हमारे लिए काफी कुछ आर्डर कर दिया। जब हमने खाना ख़तम किया तो भी लगभग एक-तिहाई खाना टेबल पर बचा हुआ था।
जब हम restaurant से निकल रहे थे, तो उन बूढी औरतों ने हमसे अंग्रेजी में बात की, हम समझ गए कि वे हमारे इतना अधिक खाना waste करने से नाराज़ थीं।
” हमने अपने खाने के पैसे चुका दिए हैं, हम कितना खाना छोड़ते हैं इससे आपका कोई लेना-देना नहीं है।”, मेरा कलीग उन बूढी औरतों से बोला। वे औरतें बहुत गुस्से में आ गयीं। उनमे से एक ने तुरंत अपना फ़ोन निकला और किसी को कॉल की। कुछ देर बाद, Social Security Organization का कोई आदमी अपनी यूनिफार्म में पहुंचा। मामला समझने के बाद उसने हमारे ऊपर 50 Euro का fine लगा दिया। हम चुप थे।
ऑफिसर हमसे कठोर आवाज़ में बोला, “उतना ही order करिए जितना आप consume कर सकें, पैसा आपका है लेकिन संसाधन सोसाइटी के हैं। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं। आपके पास संसाधनों को बर्वाद करने का कोई कारण नहीं है।”
इस rich country के लोगों का mindset हम सभी को लज्जित करता है। हमे सचमुच इस पर सोचना चाहिए। हम ऐसे देश से हैं जो संसाधनों में बहुत समृद्ध नहीं है। शर्मिंदगी से बचने के लिए हम बहुत अधिक मात्रा में आर्डर कर देते हैं और दूसरों को treat देने में बहुत सा food waste कर देते हैं।
(सौजन्य: एक दोस्त जो अब बहुत बदल गया है)
The Lesson Is – अपनी खराब आदतों को बदलने के बारे में गम्भीरता से सोचें। Expecting acknowledgement, कि आप ये मैसेज पढ़ें और अपने कॉन्टेक्ट्स को फॉरवर्ड करें।
Very True- “MONEY IS YOURS BUT RESOURCES BELONG TO THE SOCIETY / पैसा आपका है लेकिन संसाधन समाज के हैं।”
दोस्तों, कोई देश महान तब बनता है जब उसके नागरिक महान बनते हैं। और महान बनना सिर्फ बड़ी-बड़ी achievements हासिल करना नही है…महान बनना हर वो छोटे-छोटे काम करना है जिससे देश मजबूत बनता है आगे बढ़ता है। खाने की बर्बादी रोकना, पानी को waste होने से बचाना, बिजली को बेकार ना करना…ये छोटे-छोटे कदम हैं जो देश को मजबूत बनाते हैं।
आइये Ratan Tata जी द्वारा share किये गए इस inspirational incident से हम एक सबक लें और अपने-अपने स्तर पर देश के बहुमूल्य resources को बर्वाद होने से बचाएं और ये बात हमेशा याद रखें कि भले पैसा हमारा है पर संसाधन देश के हैं !
कृप्या इस संदेश को आगे भेजें, इस बार गर्मीयों में तापमान पैंतालीस डिग्री से ज्यादा हो सकता है | पानी और भोजन की कमी से कई पक्षी मर जाएंगे| इसलिए आप सभी से निवेदन है कि इनकी जान बचाने के लिए अपनी छत या अटारी पर रोटी और पानी का एक कटोरा रखें| 99 प्रतिशत इसे नहीँ भेजेंगे | आप भेजेंगे ? जब हम चुटकुले भेज सकते हैं | तो ये मेसेज क्योँ नहीँ ? आशा करता हूँ कि आप करेंगें!

Tuesday, 15 March 2016

True Education story in hindi सच्ची पढ़ाई




एक बार एक कंपनी में २ employees थे  .  employee A स्टाइलिश,  कॉंफिडेंट था  employee B उतना  sophisticated  नही था. पर B को A से ज़यदा Opportunity मिलती. एक बार A ने कंपनी के सीईओ से पूछा की B को क्यों ज़यदा सम्मान मिलता है जबकि वो B से ज़यदा  पढ़ा लिखा है.
तो सीईओ ने जो कहा उससे A को समझ आ गया की वो B की तरह क्यों नहीं है
Question 1.ऐसा सीईओ ने क्या कहा?
 २.इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

Answer
१. सीईओ ने कहा तुमने किताबो को पढ़कर सीखा है पर B ने ज़िंदगी की कताब को पढ़कर सीखा है
२.सिर्फ किताबो को पढ़कर हम क्वालिफिकेशन तो बढ़ा सकते हैं पर अपने experience से हमें प्रैक्टिकल नॉलेज आती है.और प्रैक्टिकल नॉलेज आती हैं विश्लेषण  और  कल्पनाशक्ति से . किसी भी प्रॉब्लम का  जब हम विश्लेषण करते हैं तो हम उससे बहुत कुछ सिख पाते  हैं.  अपनी कल्पनाशक्ति  को बढ़ते जाएं जितने भी अविष्कार हुए हैं वो सब कल्पनाशक्ति के बल पर ही हुए हैं .
ग्रैहम बेल्ल  ने कल्पना की हम दूर रहकर भी कैसे बात कर सकते हैं तो टेलीफोन का अविष्कार हो गया. 

Tuesday, 8 March 2016

Always react positively (Hindi Story)हमेशा Positively React करें


एक  एक पादरी थे.वो बहुत ही पॉजिटिव थे कभी भी किसी के बारे में गलत नहीं सोचते थे.
एक बार वो restaurant में बैठे coffee पी रहे थे तभी उन्होंने एक शिष्य को वहां देखा वो मीट खा रहा था.
पादरी ने शिष्य से  कहा ओहो  भूल गए आज फ़ास्ट का दिन है ,
शिष्य- नहीं सर में भुला नहीं हु
पादरी- तो तुम्हे  ज़रूर doctor ने ये खाने को कहा  होगा
शिष्य- नहीं सर doctor ने भी नहीं कहा
पादरी- आसमान की तरफ देखते हैं , कुछ कहते हैं जिससे उस शिष्य को अपनी गलती का एहसास होता है

Question- 1. पादरी क्या कहते हैं
२- इस कहानी का Moral क्या है

Ans 1.पादरी आसमान की तरफ देखकर कहते है "हे भगवन हम आज की generation से हम कितना सीख सकते है ये गलती करने पर उसे छिपाने के लिए  झूट नहीं बोलते "

२,इस कहानी का Moral है की हमेशा हर व्यक्ति वास्तु और घटना में अच्छाई देखे उससे हमें फायदा होगा नेगेटिव सोचने से हम अपना ही नुकसान करेंगे

Saturday, 5 March 2016

Miracles in life hindi story (जीवन में चमत्कार)

                                    

एक समय की बात है किसी गाव में रामकिशन नाम का एक व्यक्ति रहता था.उसके परिवार में उसकी पत्नी सावित्रीय  और एक बेटा  था. एक बार पति पत्नी खेत पर गए हुए थे. घर पर बेटा अकेला था तभी घर पर आग लग गई.जब सावित्रीय को ये पता चला तो वह दौड़ती हुई आई और जलते हुए घर में घुस गई अपने बेटे को बचाने .सबने सोच इतनी तेज़ आग से तो सावित्रीय का बाहर आना मुस्किल है . तभी सब देखते क्या है सावित्रीय अपने बेटे के साथ बाहर आ रही है.
जिस सावित्रीय को ज़रा सा जब रोटी सकते में हाथ जल जाता था वो जलन बहुत तकलीफ देती थी वो आज जलते हुए घर में से अपने बेटे को बचा लायी . अपने बेटे के प्यार में उसने miracle कर दिए. ये है human mind की powerजो बहुत बड़े miracle कर सकती है बस ज़रूरत है एक inspiring goal की
एक रॉकेट में जब आग लगी होती है तो वो अपने destination पर ही जाकर रुकता है.
इसी तरह जब हम कोई बढ़ा aim अपने सामने रखते हैं तो हमरी काम करने की ताकत कई गुना बढ़ जाती है .